देओला दादा पिलानिया
देओला दादा (1611 - 1643)
पिता का नाम - राम सिंह पिलानिया
माता का नाम - राज कौर
जन्म स्थान - पिलानी (1611)
मृत्यु स्थान - झोझू कलां (1643)
आयु - 32 वर्ष
वंश - पिलानिया
झोझू कलां मैं उनका एक मंदिर भी है.
लोक देवता : देओला दादा पिलानिया वंश के लोक देवता हैं।
देओला दादा की घोड़ी : देओला दादा की घोड़ी का नाम रामप्यारी था. देओला दादा को यह घोड़ी उनके पिता ने दी थी. इस घोड़ी का रंग सफेद था.
पिलानिया वंश के लोक देवता देओला दादा हैं. उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर कसाइयों से गुजरी लीलावती की गायों की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त की थी।
एक दिन देओला दादा अपने समधी छज्जू राम से मिलने उनके गाँव गए थे। मिलकर जब वे वापस अपने गाँव लौट रहे थे, तभी रास्ते में उन्होंने देखा कि कुछ कसाइयों ने एक महिला गुजरी लीलावती की गायों को जबरन ले जा रहे थे। देओला दादा से यह अन्याय देखा नहीं गया। उन्होंने बिना किसी भय के कसाइयों का विरोध किया और लीलावती की गायों को छुड़ाने के लिए उनसे युद्ध किया। संघर्ष के दौरान देओला दादा ने गायों की रक्षा करते हुए अद्भुत वीरता और साहस का परिचय दिया। गायों को बचाते-बचाते देओला दादा वीरगति को प्राप्त हो गए। उनके इस बलिदान के कारण वह एक गौ-रक्षा का अमर प्रतीक बन गए है, जिसे आज भी लोग श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं।
देओला दादा की वंशावली :
राव केहरी सिंह पिलानिया
पुत्र : कुमार भादरमल पिलानिया और कुमार गंगा पिलानिया
पुत्री : राधा देवी
राव भादरमल पिलानिया
पुत्र : कुमार लक्ष्मण पिलानिया और कुमार विजयपाल पिलानिया
पुत्री : पालू देवी, सरबती देवी
राव लक्ष्मण सिंह पिलानिया
पुत्र : कुमार दयाराम पिलानिया
पुत्री : हंसा देवी
राव दयाराम पिलानिया
पुत्र : कुमार राम पिलानिया और नैन सुख पिलानिया
राव राम पिलानिया
पुत्र :
• कुमार देओला दादा पिलानिया
• कुमार प्रताप पिलानिया
• कुमार उदय पिलानिया
• कुमार रतन पिलानिया
राव देओला दादा पिलानिया
भाई :
• वीर प्रताप पिलानिया
• वीर उदय पिलानिया
• वीर रतन पिलानिया
देओला दादा की जयंती :
देओला दादा की जयंती भाद्रपद की चतुर्दशी शुक्ल पक्ष को बनाई जाति है.
झोझू कलां में उनका एक मंदिर भी है.
मेले का स्थान : झोझू कलां उनका मेला लगता है.
समय : मेला भाद्रपद सुदी चतुर्दशी शुक्ल पक्ष को लगता है.
पूजा : मेले के समय उनकी जोर-सोर से पूजा होती है और भक्त अपनी श्रद्धा से उनकी आरती करते हैं.
देओला दादा की शिक्षा
देओला दादा के गुरु का नाम पीरू राम जी था.
पीरू राम जी ने ही उन्हें शस्त्र शिक्षा सिखाई और धर्म - अधर्म का ज्ञान दिया था.
पीरू राम जी ने ही उन्हें तलवार बाजी और धनुष विद्या का ज्ञान दिया था.
उन्होने ही देओला दादा जी को दीक्षा दि थी.
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